नई दिल्ली। वैश्विक शांति, पारस्परिक सम्मान और अंतरराष्ट्रीय न्याय के समर्थन में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सामाजिक एवं जागरूक नागरिकों ने युद्धोन्मादी नीतियों और अन्याय के खिलाफ संगठित आवाज़ उठाने की घोषणा की है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आज विश्व की शांति और स्थिरता को कमजोर करने वाली शक्तियाँ अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए घातक हथियारों के व्यापार, प्राकृतिक संसाधनों पर कब्ज़ा, व्यापारिक नियंत्रण, राजनीतिक वर्चस्व और सांस्कृतिक प्रभुत्व जैसी नीतियों को बढ़ावा दे रही हैं।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जो भी आवाज़ पीड़ितों और वंचितों के पक्ष में उठती है, उसे दबाने का प्रयास किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के एक बड़े वर्ग पर भी पक्षपातपूर्ण प्रस्तुति का आरोप लगाते हुए कहा गया कि विशेष रूप से आयतुल्लाह ख़ामनेई के संदर्भ में अपनाई गई भाषा न्यायप्रिय लोगों की भावनाओं को आहत करती है। साथ ही यह भी कहा गया कि देश का एक हिस्सा मीडिया भी इस प्रवृत्ति से प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति में भारत सरकार के उस रुख की सराहना की गई, जिसमें भारत संयुक्त राष्ट्र में ईरान के विरुद्ध अमेरिकी प्रस्ताव का हिस्सा नहीं बना। इसे शांति-समर्थक देशों और लोगों के लिए सकारात्मक संदेश बताया गया।
अमेरिकी अधिकारियों द्वारा आयतुल्लाह ख़ामनेई के विरुद्ध कथित अपहरण जैसी धमकियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसी संप्रभु राष्ट्र के नेतृत्व को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन है।
संगठन ने विश्व के सभी न्यायप्रिय नागरिकों हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, यहूदी, बौद्ध तथा अन्य सभी समुदायों से अपील की कि वे युद्धोन्माद के बजाय संवाद, पारस्परिक सम्मान और कानून के शासन का समर्थन करें।

मुख्य माँगें इस प्रकार हैं :–
• ईरान के नेतृत्व के विरुद्ध हत्या या अपहरण जैसी धमकियों को तत्काल बंद किया जाए।
• अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों की निष्पक्ष वैश्विक जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
• युद्ध की धमकियों के स्थान पर कूटनीति और वार्ता को प्राथमिकता दी जाए।
• संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ प्रभावी और सक्रिय भूमिका निभाएँ।
राष्ट्रीय शांति अभियान की घोषणा
प्रेस विज्ञप्ति में राष्ट्रीय स्तर पर हस्ताक्षर अभियान, शांतिपूर्ण सभाएँ, विचार-गोष्ठियाँ और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की गई है।वक्ताओं ने कहा कि यह किसी एक देश का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी मानवता की परीक्षा है। यदि आज एक राष्ट्र के नेतृत्व को निशाना बनाया जा सकता है, तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।अंत में ईरान की जनता और उसके नेतृत्व के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए हर प्रकार की धमकी-आधारित राजनीति को अस्वीकार करने की बात दोहराई गई।
