वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में का कोरम निष्क्रियता से वक़्फ़ संपत्तियाँ असुरक्षित, सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे : मौलाना इफ्तिख़ार हुसैन इंक़लाबी

Save Waqf India Mission के बयान पर लखनऊ से उठी गंभीर चेतावनी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में लंबे समय से सदस्य पदों पर नियुक्ति न होने को लेकर अब चिंता केवल वक़्फ़ संस्थाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह मुद्दा न्याय, शासन और संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ा प्रश्न बनता जा रहा है। Save Waqf India Mission द्वारा जारी प्रेस नोट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मौलाना इफ्तिख़ार हुसैन इंक़लाबी ने कहा कि ट्रिब्यूनल की निष्क्रियता का सीधा असर वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा और आम लोगों को मिलने वाले न्याय पर पड़ रहा है।

मौलाना इंक़लाबी ने कहा कि वक़्फ़ संपत्ति ईश्वर के नाम पर समर्पित सामाजिक अमानत होती है, जिसकी देखरेख केवल वक़्फ़ बोर्ड या मुतवल्ली की नहीं, बल्कि राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। “जब वैधानिक संस्थाएं अधूरी रहती हैं, तो न्याय कमजोर होता है और अवैध तत्वों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है,” उन्होंने कहा।

सदस्य न होने से न्यायिक प्रक्रिया बाधित

उन्होंने बताया कि वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में सदस्य नियुक्त न होने के कारण सैकड़ों मामले वर्षों से लंबित हैं। इसका सबसे अधिक असर उन गरीब मुतवल्लियों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जिनके पास न तो कानूनी संसाधन हैं और न ही प्रभावशाली लोगों से मुक़ाबला करने की क्षमता।

उनका कहना था कि ट्रिब्यूनल का उद्देश्य ही यह था कि वक़्फ़ से जुड़े विवादों का त्वरित और सस्ता समाधान मिल सके, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह उद्देश्य अधूरा दिखाई देता है।

Save Waqf India Mission की मांगों को बताया न्यायोचित

मौलाना इफ्तिख़ार हुसैन इंक़लाबी ने Save Waqf India Mission के वाइस प्रेसिडेंट सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन द्वारा उठाई गई मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं। इनमें

• वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में सभी रिक्त सदस्य पदों पर शीघ्र नियुक्ति,
•नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी की निष्पक्ष समीक्षा,
•और वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए ठोस प्रशासनिक कदम शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यदि ट्रिब्यूनल समय पर सक्रिय होता है, तो न केवल लंबित मामलों का समाधान होगा, बल्कि अवैध कब्ज़ों और विवादों पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।“यह सिर्फ़ समुदाय का नहीं, क़ानून के राज का सवाल

अपने बयान के अंत में मौलाना इंक़लाबी ने कहा कि यह विषय किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है।“यह Rule of Law और न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मसला है। वक़्फ़ संपत्ति किसी व्यक्ति या सरकार की जागीर नहीं, बल्कि समाज के लिए छोड़ी गई ईश्वरीय अमानत है। इसकी हिफ़ाज़त में कोताही, शासन-तंत्र की गंभीर विफलता मानी जाएगी”उन्होंने कहा

उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस विषय पर शीघ्र संज्ञान लेगी और वक़्फ़ ट्रिब्यूनल को पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाकर जनता के विश्वास को बहाल करेगी।

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