तेहरान | 18 दिसंबर 2025
नगराम टाइम्स विशेष रिपोर्ट | सैयद हसनैन मुस्तफा
तेहरान की सरज़मीं से भारत के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण संदेश सामने आया है। भारत की सुप्रीम धार्मिक शख़्सियत, आफ़ताब-ए-शरीअत हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद क़लबे जवाद नक़वी साहब को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैचारिक सम्मानों में शामिल “पहला इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड” से नवाज़ा गया है।
यह सम्मान न सिर्फ़ एक महान आलिम-ए-दीन का एतिराफ़ है, बल्कि भारत की दीनि, इल्मी और इन्क़िलाबी परंपरा की अंतरराष्ट्रीय तस्दीक़ भी है।

तेहरान इंटरनेशनल समिट हॉल में ऐतिहासिक समारोह
यह भव्य और यादगार सम्मान समारोह बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को तेहरान इंटरनेशनल समिट हॉल में आयोजित हुआ।
समारोह में ईरान सहित दुनिया के विभिन्न देशों से आए प्रख्यात विद्वानों, बुद्धिजीवियों, विचारकों और इमाम ख़ुमैनी के चिंतन पर काम करने वाले विशेषज्ञों की उल्लेखनीय मौजूदगी रही।
इसी मंच से ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान और इस्लामी क्रांति के संस्थापक हज़रत इमाम ख़ुमैनी (रह.) के पौत्र मौलाना सैयद हसन ख़ुमैनी ने मौलाना क़लबे जवाद नक़वी साहब को यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।
इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड : विचार, इंसाफ़ और जनभागीदारी का प्रतीक
इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड क़ौमी और बैनुल-अक़वामी स्तर का अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान है। इसका उद्देश्य उन शख़्सियतों को पहचान देना है, जिन्होंने इमाम ख़ुमैनी (रह.) की विचारधारा, उनके नैतिक मूल्यों और सामाजिक इंसाफ़ की सोच को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया हो।
इस पुरस्कार को पहली बार 2013 में स्वीकृति मिली थी, जबकि 2023 में इसके नियमों और संरचना में संशोधन के बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया। यह अवॉर्ड दस वैचारिक विषयों पर आधारित है, जिनमें ज्ञान, समाज, राजनीति, नैतिकता और भ्रष्टाचार-विरोध जैसे अहम पहलू शामिल हैं।
सैयद हसन ख़ुमैनी : “यह पुरस्कार एक जीवंत विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है”
समारोह को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद हसन ख़ुमैनी ने कहा कि यह पुरस्कार एक ऐसे जीवंत स्कूल ऑफ़ थॉट का प्रतीक है, जिसने इतिहास की धारा को मोड़ा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी महान व्यक्तित्व का मूल्य उसके द्वारा इतिहास पर छोड़े गए प्रभाव से आँका जाता है, और इमाम ख़ुमैनी (रह.) ने समकालीन युग पर गहरा और स्थायी प्रभाव छोड़ा है।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का स्पष्ट संदेश
ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि इमाम ख़ुमैनी को जनता पर अटूट विश्वास था।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा—
“यदि जनता हमसे मुँह मोड़ ले, तो न क्रांति बचेगी और न ही धर्म।”
राष्ट्रपति ने सभी संबंधित अधिकारियों को सलाह दी कि वे इमाम ख़ुमैनी के मार्ग पर चलते हुए जनता की सेवा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं।
मौलाना क़लबे जवाद नक़वी: हक़ और इंसाफ़ की निर्भीक आवाज़
मौलाना सैयद क़लबे जवाद नक़वी साहब सिर्फ़ एक धार्मिक विद्वान नहीं, बल्कि समाज में इंसाफ़, वक़्फ़ की हिफ़ाज़त और मज़लूमों की आवाज़ बनने वाली शख़्सियत हैं।
उनकी बेबाकी, साफ़गोई और निडर रुख़ ने उन्हें भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है।
पहला इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड उनके उसी किरदार का वैश्विक सम्मान है, जिसमें उन्होंने बिना किसी समझौते के सच का साथ दिया।
नगराम टाइम्स का दृष्टिकोण
तेहरान में मिला यह सम्मान यह साबित करता है कि
सच, संघर्ष और इस्तिक़ामत कभी ज़ाया नहीं जाते।
आज यह अवॉर्ड भारत के लिए गौरव है, उलेमा के लिए हौसला है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मज़बूत संदेश।
नगराम टाइम्स की ओर से आफ़ताब-ए-शरीअत मौलाना सैयद क़लबे जवाद नक़वी साहब को दिली मुबारकबाद।
