जनपद Barabanki में Iran पर United States और Israel के कथित हमलों की खबर ने गहरा असर छोड़ा। खबर फैलते ही शहर से देहात तक मस्जिदों और इमामबाड़ों में दुआ-ए-तवस्सुल और जियारत-ए-आशूरा की हुड़क उठी।

सैयदवाड़े के 52 गांवों में रो-रोकर दुआ
सैयदवाड़े के 52 गांवों जिनमें Kintoor शामिल है, जो इमाम ख़ुमैनी के पूर्वजों का पैतृक गांव माना जाता है में लोगों ने नम आंखों से दुआएं मांगीं। मस्जिदों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, नौजवान और बच्चे एकत्र हुए और ईरान की सलामती व अमन के लिए हाथ उठाए।
शहर की इबादतगाहों में विशेष दुआ
बाराबंकी शहर की कई अहम इबादतगाहों
- करबला सिविल लाइंस
- इमामबाड़ा वक्फ नवाब अमजद अली खान
- मस्जिद गुलाम अस्करी
- मस्जिद इमामिया पीर बटावन
में नमाज़ के बाद उलेमा ने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव इंसानियत के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने अमन, इंसाफ और सुरक्षा के लिए सामूहिक दुआ कराई।
किन्तुर में मजलिस और दुआ
किन्तुर में विशेष मजलिस के बाद दुआ-ए-तवस्सुल और जियारत-ए-आशूरा पढ़ी गई। उलेमा ने लोगों को सब्र, एकता और हक़ पर कायम रहने की सीख दी।
गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल
कई जगहों पर गैर-मुस्लिम भाइयों ने भी अमन और भाईचारे की दुआ की। सोशल मीडिया पर भी दुआओं के वीडियो वायरल हुए और ईरान के साथ संवेदना जताई गई।
उलेमा की अपील
उलेमा-ए-कराम ने जनता से अफवाहों से बचने, अमन बनाए रखने और दुनिया में शांति की दुआ करने की अपील की।
अंत में सामूहिक दुआ की गई :
“ऐ अल्लाह! जंग की आग ठंडी कर दे, मजलूमों को हिफ़ाज़त दे, और दुनिया में अमन कायम कर।”
