
नगराम टाइम्स ब्यूरो/लखनऊ ख़ानदान-ए-इज्तेहाद की अज़ीम हस्ती, बुज़ुर्ग आलिम मौलाना सैयद मोहम्मद अली हैदर नक़वी मरहूम की चालीसवें की मजलिस छोटा इमामबाड़ा में ख़ान वादे गुफ़रान मआब से बड़े अकीदतमंदाना माहौल में सम्पन्न हुई। मजलिस की शुरुआत कुरआन ख़्वानी से हुई, जिसके बाद नामवर शायरों ने मंज़ूम नज़राने-ए-अक़ीदत पेश किए। इस मौके पर भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथॉरिटी, आफ़ताबे शरीअत मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी ने मजलिस को ख़िताब किया। अपने ख़िताब में उन्होंने कहा :“नमाज़ और रोज़ा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का वादा है, मजालिस-ए-अज़ा अल्लाह का वादा है। औक़ाफ़ की तहरीक को नुक़सान पहुँचाने वाले, दर हक़ीक़त इमाम-ए-ज़माना के मुजरिम हैं।”अमामा गुज़ारी का ऐतिहासिक लम्हा मजलिस के बाद मरहूम मौलाना सैयद मोहम्मद अली हैदर नक़वी के बेटे मौलाना सैयद रिज़वान हैदर नक़वी सद्रुल अफ़ाज़िल की अमामा गुज़ारी हुई। मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी ने अपने हाथों मौलाना सैयद रिज़वान हैदर नक़वी के सर पर अमामा रखा और उन्हें दुआओं से नवाज़ा। यह रूहानी लम्हा पूरे खानदान और मोमिनीन के लिए ख़ुशी और इज़्ज़त का सबब बना। सलाहियत और खिदमत मौलाना सैयद रिज़वान हैदर नक़वी कई सलाहियतों के मालिक और नेक इंसान माने जाते हैं। हुसैनी चैनल पर कई प्रोग्राम पेश कर क़ौम और समाज को नई दिशा देने का शरफ हासिल किया। दुआएं और उम्मीदें मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी ने कहा :“मौलाना मोहम्मद अली हैदर साहब मरहूम मेरी हर तहरीक में साथ रहे। मुझे यक़ीन है कि मौलाना रिज़वान हैदर नक़वी भी उसी तरह हमारी हर तहरीक में हमारे हमराह रहेंगे और इल्मी व तहरीकी सफ़र को और आगे बढ़ाएँगे।”
सेव वक़्फ़ इंडिया का बयान
इस मौके पर सेव वक़्फ़ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा ने भी ख़ास बयान देते हुए कहा :“आज की अमामा गुज़ारी सिर्फ एक खानदान का नहीं बल्कि पूरी क़ौम का गर्व है। मौलाना रिज़वान हैदर नक़वी साहब जैसे जदीद सोच रखने वाले और दीनी ख़िदमत के जज़्बे से सरशार आलिम का आगे आना हमारी तहरीक़ात और औक़ाफ़ की हिफ़ाज़त के लिए नई ताक़त साबित होगा। यह वह लम्हा है जब खानदान ए इज्तेहाद की रौशन परंपरा नई नस्ल में मुत्तहिद हो रही है। हमें पूरा यक़ीन है कि वह अपने वालिद मरहूम की तरह क़ौम, औक़ाफ़ और समाज के लिए हर मैदान में खड़े नज़र आएँगे।”इज़्ज़त का समामौलाना सैयद रिज़वान हैदर नक़वी ने तमाम उलमा और मोमिनीन का शुक्रिया अदा किया, ख़ास तौर से अपने चचा मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी का। उन्होंने दुआ की कि वह हमेशा दीनी ख़िदमत और औक़ाफ़ की तहरीक में हमेशा साथ थे अपने वालिद की तरह और रहेंगे। ख़ान वादे गुफ़रानमॉब इस मौके पर सलवात और जज़्बात से गूंज उठा। अमामा गुज़ारी का यह ऐतिहासिक वाक़िया ख़ानदान-ए-इज्तेहाद की इल्मी व तहरीकी विरासत को नई रौशनी और नया सफ़र अता कर गया।इस मौक़े पर दीनी और मज़हबी मौज़ूआत खासतौर से अहलेबैत अ०स० के सिलसिला में सैकड़ो आर्टिकल लिखने वाले मशहूर अहले क़लम “ज़िया-ए-मासूमीन” मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी, चांद कमेटी के सेक्रेटरी मौलाना तस्नीम मेहंदी, ऐरा के वाइस चांसलर डॉ हैदर अब्बास, प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद, सोशल रिफॉर्मर नेहाल खान, एडिटर अमान अब्बास सहाफत, मौलाना हसन ज़हीर, मातमी अंजुमनो, मोमिनीन मौजूद थे।
