भारतीय जायरीनों को कर्बला में अरबाइन पर इराकी नागरिकों द्वारा नमस्ते कहकर किया जाता है सम्मान,देखिए खास रिपोर्ट

सैयद रिज़वान मुस्तफा रिज़वी

करबला इराक – काजमैन से करबला के पैदल सफर में एक माेकिफ में रुका तो वहा पूछा लोगो ने कहा से है इशारे से,मैने इंडिया कहा फिर हिंदुस्तान फिर हिंदी कहा तो उछल पड़े गले लगाने लगे,उन्होंने हाथ जोड़कर नमस्ते नमस्ते कहकर मेरा इस्तेकबाल किया,आज मैं हरम इमाम हुसैन के रौज़े से लौट रहा था तो मेडिकल कैंप लगा था रुक गया वीडियो बनाने लगा तो पूछा कहा से मैने जवाब दिया इंडिया से हिंदी सब नमस्ते कर इस्तेकबाल किया इशारा कर ब्लड प्रेशर शुगर चेक किया और बहुत खुश हुए मैं पहले तो चौका फिर अपने भारत के नमस्ते की मकबूलियत पर मैं खुश था,इस बारे में कई वरिष्ट पत्रकारों ,समाज सेवियो और सोशल रिफॉर्मर धर्म गुरु से बात हुई ।

आपको बता दे कर्बला, इराक का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जिसे शिया मुसलमानों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ की धरती पर इमाम हुसैन की शहादत की याद में हर साल अरबाइन के अवसर पर बड़ी संख्या में जायरीनों का आगमन होता है। इस धार्मिक यात्रा के दौरान, भारतीय जायरीनों को विशेष सम्मान प्राप्त होता है, जिसे इराकी नागरिकों द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। यह सम्मान न केवल धार्मिक भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी सम्मान का भी प्रतीक है। आपको बता दे कर्बला के वाकए में भारत से भी कश्मीरी पंडित आए थे मदद के लिए जो वाक्ये के बाद पहुंचे थे।इसके अलावा अवध के नवाबों के दौर में रौजे की तामीर और जरी का निर्माण करवाया गया था,

भारत के मशहूर सोशल रिफॉर्मर शिया धर्म गुरु सैयद कल्बे रूशैद रिजवी जो करबला में मौजूद है बताते है अरबयीन, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के 40 दिन बाद मनाया जाने वाला धार्मिक आयोजन है। यह शोक और श्रद्धा का एक विशेष अवसर है, जिसमें लाखों जायरीनों का कर्बला में आगमन होता है। कर्बला, इराक के शिया मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है, जहाँ इमाम हुसैन और उनके साथियों ने 680 ईस्वी में यजीद की सेना के जुल्म के खिलाफ इंसानियत हक सच्चाई इंसाफ बचाने के लिए कुर्बानी दिया था। यह शहादत शहादत और न्याय के प्रतीक के रूप में जानी जाती है, और अरबयीन के दिन उनकी शहादत की याद में विशेष आयोजन किए जाते हैं।

युवा उद्योगपति और हर साल करबला अरबायीन की जियारत करने आने वाले शुजा अब्बास बताते है भारत में शिया सुन्नी समुदाय के लोग भी अरबाइन के अवसर पर कर्बला की ओर यात्रा करते हैं। भारतीय जायरीनों की यात्रा धार्मिक भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक होती है। इन जायरीनों की यात्रा न केवल उनकी आस्था को दर्शाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार विभिन्न संस्कृतियों और देशों के लोग एक समान धार्मिक भावना से जुड़े हुए हैं। भारतीय जायरीनों की संख्या कर्बला में अरबाइन के अवसर पर काफी होती है, और उनके आगमन का स्वागत इराकी नागरिकों द्वारा बड़े आदर और सम्मान के साथ किया जाता है।

दा लीडर मैगजीन के एडिटर अशरफ जैदी बताते है इराकी नागरिक भारतीय जायरीनों का स्वागत करने के लिए कई विशेष आयोजनों और परंपराओं का पालन करते हैं। कर्बला की सड़कों पर भारतीय जायरीनों का स्वागत करने के लिए इराकी नागरिक विशेष रूप से तैयार होते हैं। यहाँ उन्हें न केवल धार्मिक स्थलों पर जाने की सुविधा मिलती है, बल्कि उन्हें भोजन, पानी, और आवास की भी व्यवस्था प्रदान की जाती है।

दा रिपोर्ट के एडिटर वसीम अकरम त्यागी बताते है,कर्बला में भारतीय जायरीनों को सम्मानित करने की यह परंपरा दर्शाती है कि धार्मिक यात्रा में शामिल होने वाले सभी लोगों का समान आदर किया जाता है। इराकी नागरिक भारतीय जायरीनों को “नमस्ते” कहकर सम्मानित करते हैं, जो कि भारत और इराक के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक है। इस सम्मान के पीछे का उद्देश्य न केवल भारतीय जायरीनों को उनकी धार्मिक यात्रा के लिए सम्मानित करना है, बल्कि यह भी दर्शाना है कि विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के लोग एक ही धार्मिक उद्देश्य की ओर बढ़ रहे हैं।

सहाफत ग्रुप के एडिटर इन चीफ अमान अब्बास कहते है, भारतीय जायरीनों का कर्बला में सम्मान इराकी नागरिकों द्वारा किए गए आतिथ्य का उदाहरण है जो धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है। यह सम्मान दर्शाता है कि विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोग एक ही धार्मिक मान्यता और श्रद्धा के आधार पर एकत्रित हो सकते हैं। इराकी नागरिकों द्वारा भारतीय जायरीनों को सम्मानित करना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक धार्मिक समुदाय के बीच आपसी समझ और सम्मान की भावना प्रबल है।

भारतीय और इराकी रिश्तों पर प्रभाव

इंडिया टीवी के इराक कवरेज के लिए आए सीनियर रिपोर्टर शोएब रज़ा बताते है भारतीय जायरीनों को कर्बला में इराकी नागरिकों द्वारा किए गए सम्मान का प्रभाव भारतीय और इराकी रिश्तों पर भी देखा जा सकता है। यह सम्मान दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक सहयोग को प्रोत्साहित करता है। जब भारतीय जायरीनों को इस प्रकार के सम्मान प्राप्त होते हैं, तो यह दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने में सहायक होता है। यह धार्मिक यात्रा न केवल व्यक्तिगत श्रद्धा की यात्रा है, बल्कि यह देशों के बीच बेहतर समझ और सहयोग का भी प्रतीक है।

ईरान इराक से कारोबारी तालुक रखने वाले भारत के इंपोर्ट एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन चैंबर ऑफ कॉमर्स के जहीर हसन बताते है भारतीय जायरीनों को कर्बला में अरबयीन के अवसर पर इराकी नागरिकों द्वारा सम्मानित करने की परंपरा धार्मिक भक्ति, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, और आपसी सम्मान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह न केवल भारतीय और इराकी समुदायों के बीच धार्मिक एकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत करता है कि विश्व भर के लोग अपनी धार्मिक यात्राओं के माध्यम से एक दूसरे के प्रति सम्मान और समझ को बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार, कर्बला में भारतीय जायरीनों को सम्मानित करने की परंपरा एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक घटना है जो विश्व भर के विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग और एकता को बढ़ावा देती है।

भारत के गायत्री परिवार जिसके 13करोड़ अनुनायी है के प्रवक्ता अखिलेश पांडे बताते है

“नमस्ते” एक हिंदी शब्द है जो भारतीय उपमहाद्वीप, विशेषकर भारत और नेपाल में, अभिवादन के रूप में उपयोग किया जाता है। यह एक संस्कृत शब्द से आया है, जिसमें “नमः” का अर्थ होता है “सादर निवेदन” और “ते” का अर्थ होता है “आपके लिए”। इस प्रकार, “नमस्ते” का शाब्दिक अर्थ है “आपको सादर प्रणाम” या “मैं आपको आदरपूर्वक नमस्कार करता हूँ”।

उन्होंने तफसील से बताते हुए कहा कि यह अभिवादन का एक सामान्य तरीका है जिसका प्रयोग मित्रों, परिवार, और अजनबियों के साथ किया जाता है। यह न केवल एक साधारण हाय या हेलो का विकल्प है, बल्कि यह सम्मान और आदर को भी दर्शाता है।

भारतीय संस्कृति में, “नमस्ते” का उपयोग न केवल एक अभिवादन के रूप में होता है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मान्यता का भी प्रतीक है। यह दिखाता है कि हम दूसरे व्यक्ति में दिव्यता और आदर मानते हैं।

“नमस्ते” एक सादगीपूर्ण और विनम्र अभिवादन है, जो किसी भी प्रकार के शारीरिक संपर्क के बिना सम्मान प्रकट करता है। इसे हाथों को जोड़कर या हल्के सिर झुका कर किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति में आदर का प्रतीक है।

भारत और नेपाल के अलावा, “नमस्ते” का उपयोग कई अन्य देशों में भी किया जाता है, विशेष रूप से उन स्थानों पर जहाँ भारतीय संस्कृति का प्रभाव है।

“नमस्ते” सिर्फ एक शब्द नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की गहरी भावना को दर्शाता है।

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