आगरा में काजी नुरुल्लाह शुस्त्री की मजार पर भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की ओर से वफा अब्बास ने पेश की चादर,देश दुनिया में अमन और शांति एकता के लिए हुई दुआएं

नगराम टाइम्स ब्यूरो/आगरा :

हजरत काजी नुरुल्लाह शुस्त्री शहीद-ए-सालिस की मज़ार पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से चादर पेश की गई। यह चादर अम्बर फाउंडेशन के चेयरमैन वफा अब्बास ने अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ मज़ार पर पेश कर देश-दुनिया में अमन, शांति और एकता के लिए विशेष दुआएं की गई।

काजी नुरुल्लाह शुस्त्री का नाम भारतीय इतिहास में निडर न्यायविद के रूप में दर्ज है। वे हमेशा हक और इंसाफ के पक्ष में खड़े रहे। उनकी सच्चाई और न्यायप्रियता मुगल बादशाह जहांगीर को अच्छी नहीं लगी,बादशाह जहांगीर ने उनकी जबान खींचवा दी और उनकी लाश को जंगल में फेंक दिया गया। परंतु, आज उनकी शहादत और मज़ार के अस्तित्व ने उन दुश्मनों की साजिशों को पराजित कर दिया है। उनका मजार आज भी अमन, इंसाफ और सच्चाई के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बना हुआ है।

काजी नुरुल्लाह की याद में हर साल दीपावली के अवसर पर यहां सालाना मजलिस का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश की नामचीन हस्तियां, जज, धार्मिक नेता और सैकड़ों अनुयायी शामिल होते हैं।

वफा अब्बास ने मजार पर हाजिरी देते हुए कहा, “काजी नुरुल्लाह शुस्त्री की शहादत इंसाफ, हक, और सच्चाई के प्रति समर्पण की अद्वितीय मिसाल है। उनकी मज़ार हमें न्याय और सच्चाई के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है।” उन्होंने बताया कि देश के रक्षा मंत्री माननीय राजनाथ सिंह का इस मज़ार पर चादर भेजना इस बात का प्रतीक है कि भारत की सरकार न्याय और अमन की राह को सम्मान देती है।

मज़ार पर हाजिरी के दौरान वफा अब्बास और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने देश में अमन शांति एकता के लिए दुआ की,मज़ार की सालाना मजलिस में हर साल न्यायिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल होती हैं, जो यहां सलाम पेश कर इंसाफ के प्रति अपनी आस्था को और मजबूत बनाते हैं।

काजी नुरुल्लाह की मजार पर दी जाने वाली दुआएं उन सभी लोगों के लिए एक उम्मीद का संदेश हैं, जो सच्चाई और इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे हैं।काजी नुरुल्लाह शुस्त्री शहीद-ए-सालिस की मज़ार पर रक्षा मंत्री की ओर से चादर पेश कराना एक विशेष सम्मान और धार्मिक परंपरा का प्रतीक है, जो समाज में अमन, भाईचारे और इंसाफ के महत्व को और उजागर करता है।

इस मौके पर समर मेंहदी, मौलाना वली हैदर, अली आगा, अहमद आलम, नवाब रईस भी साथ रहे।

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